Saturday, September 17, 2011

गवतातला दव पत्यावरती चिंतनचं करत होता, निथळून सांडला तेव्हा आयुष्य सारं जगाला होता.....

मैं अकेला

मेरे कल वाले मुझसे  कल मेरी मुलाकात हुई तो मैंने उससे उसकी  "खुशहाली" ...... पूछ ही ली... क्यों की मैं जानता था के वो चाहता था  के...