Friday, February 9, 2024

 Thodisi naraj lagati .....

Kabhi pareshaan...

to Kabhi anjaan ho jaati hai..


Haske khil-khilake 

Gale lag jaati...

to Kabhi bas doorse muskuraati hai...


Chahe Jaise Bhi Ho "Zindagi"..... 

Hame to Apna hi Leti Hai !!!

देखें हैं हमने हजारों ख्वाब 
ओर हजारों को तुटते भी देखा हैं...
पर कल रात  वो ख्वाब भी आया
जीसने हमें ही तोड कर रखा हैं...

कागज की कष्टी leke  वो
तुफानो में चली गयी ...
चमन भी ना देखा तान्हा कभी
वो रन ही  आकेली गयी




मैं अकेला

मेरे कल वाले मुझसे  कल मेरी मुलाकात हुई तो मैंने उससे उसकी  "खुशहाली" ...... पूछ ही ली... क्यों की मैं जानता था के वो चाहता था  के...