Wednesday, October 12, 2022

 

समंदर किनारे बैठे हम
एक बूंद को तरसते रहे...
आंखों के बादल भी तब
सारी रात बरसते रहे...


मैं अकेला

मेरे कल वाले मुझसे  कल मेरी मुलाकात हुई तो मैंने उससे उसकी  "खुशहाली" ...... पूछ ही ली... क्यों की मैं जानता था के वो चाहता था  के...