मैं लिख पता ....
अपणी बात ....
तब तक खत्म हुई
कलम की स्याही.....
पर सबने तो
मेरे हुनर पे ही
उंगली उठाई
मेरी सच्चई
जो शायद ही सच थी
उसपर ना दि
किसिने कोई गवाही
मैं खुद भी अब उसे
झूट मान राहां हूँ
अब तो मैं बस
जीए जा राहा हूँ
जेव्हा आयुष्य अत्यंत निर्णायक परिस्थितीतून जात असते, ..... जिथे सर्व काही संपत आहे अस वाटते ..... त्यावेळी एक स्वप्न आपल्याला साऱ्या जगाशी लढण्याची शक्ती देऊ शकते आणि विजयी करू शकते .... (Flowers blossomed in the ashes)
मेरे कल वाले मुझसे कल मेरी मुलाकात हुई तो मैंने उससे उसकी "खुशहाली" ...... पूछ ही ली... क्यों की मैं जानता था के वो चाहता था के...
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