Sunday, September 5, 2021

 मैं लिख पता ....

अपणी बात ....

तब तक खत्म हुई 

कलम की स्याही.....


पर सबने तो 

मेरे हुनर पे ही

उंगली उठाई


मेरी सच्चई 

जो शायद ही सच थी

उसपर ना दि 

किसिने कोई गवाही


मैं खुद भी अब उसे 

झूट मान राहां हूँ

अब तो मैं बस 

जीए जा राहा हूँ

No comments:

Post a Comment

मैं अकेला

मेरे कल वाले मुझसे  कल मेरी मुलाकात हुई तो मैंने उससे उसकी  "खुशहाली" ...... पूछ ही ली... क्यों की मैं जानता था के वो चाहता था  के...