दरवाजे पे हैं मेरे खड़े
ना जाने कितने ही कर्जे
कई चुकाने है मुझे ...
तो कुछ आने भी है मेरे
सोचता हूं साभिका
हिसाब एक दिन करवा दूं...
किसी से माफी मांग लूं झुक्के
और किसीको माफ भी कर दूं ।
कई ऋण हैं
जो मेरे द्वार पे
आके खड़े हुए
बहोत से है
चुकाने और
कुछ मेरे भी आने है
सोचता हूं एक दिन मैं
सब हिसाब करवा दूं
किसी से क्षमा मांग लूं
किसीको माफ मैं कर दूं