Wednesday, March 27, 2024

दरवाजे पे हैं मेरे खड़े 

ना जाने कितने ही कर्जे

कई चुकाने है मुझे ...

 तो कुछ आने भी है मेरे


सोचता हूं साभिका 

हिसाब एक दिन करवा दूं...

किसी से माफी मांग लूं  झुक्के 

और किसीको माफ भी कर दूं ।


कई ऋण हैं

जो मेरे द्वार पे

 आके खड़े हुए 

बहोत से है

चुकाने और 

कुछ मेरे भी आने है

सोचता हूं एक दिन मैं

सब हिसाब करवा दूं

किसी से क्षमा मांग लूं  

किसीको माफ मैं कर दूं


तेरे किसी भी सवाल का जवाब 

तो हमने कभी न पाया था..

इसी लिए तो लिखी हर नज़्म को

किताबों में ही छुपाया था ...

पहले तो बस अल्फाज थे

फिर अरमान बन गए

दिले तमन्ना कभी....

कभी ईमान बन गए

जिंदगी के आसमां में

नजाने कितने ही सूरज

कई दिनों के मेहमान बन गए ।

 

न कभी मैंने साथ मांगा था

न ही देनेवाला हाथ मांगा था

फिर भी तुम साथ चले थे 

चार पल के लिए ही सही 

हस खेल कर बोले थे ....

कभी दूर से ही सही

मुस्कुरा तो दिया कर....

ऐ जिंदगी ।

हमें भी तस्सली हो ....

के थोडेसे जिंदा हम भी  हैं। ।

Tuesday, March 19, 2024

मशरूफ

ना तुम्हें कोई तकलीफ हो 
ना हमें कोई तकलीफ हो
हम हमारी दुनियाँमें मशरूफ...
तुम तुम्हारी दुनियाँमें मशरूफ हो ।

पर एक बात बतानी थी  
मशरूफियत के लिए 
तुम्हारी एक दुनिया है ...
हमारे तो बस एक तुम ही हो ...!!!!

मैं अकेला

मेरे कल वाले मुझसे  कल मेरी मुलाकात हुई तो मैंने उससे उसकी  "खुशहाली" ...... पूछ ही ली... क्यों की मैं जानता था के वो चाहता था  के...