Wednesday, March 27, 2024

तेरे किसी भी सवाल का जवाब 

तो हमने कभी न पाया था..

इसी लिए तो लिखी हर नज़्म को

किताबों में ही छुपाया था ...

पहले तो बस अल्फाज थे

फिर अरमान बन गए

दिले तमन्ना कभी....

कभी ईमान बन गए

जिंदगी के आसमां में

नजाने कितने ही सूरज

कई दिनों के मेहमान बन गए ।

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