Saturday, August 28, 2021

कलम ने कागज से 
कह दिये है...
तब जाके काहाँ......
अल्फाज "आशियानें" बने हैं।
ऐसे तो .....
खंडहर बने पडे थे 
दिल के किसीं कोणे में,
अरमान कई सारे।

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