Saturday, September 11, 2021

 कधी थोडं कमी,

कधी खूप जास्तच,

आयुष्य आहे हे 

अस तर चालायचंच

कधी जरासं खाली ,

कधी फारच वर....

नशिबाच गणित ते 

अस तर व्हायचंच


सरींवर सारी 

सुखाच्या नि दुखाच्याही

येत-जात तर राहणारच

काधी छत्रीखाली लापायच

कधी हात उंचावून भिजायचं

आयुष्य आहे हे 

अस तर चालायचंच



जिंदगी की दोराहेपे

तुटा पडा था मैं....

मुझे जोडणे की तो खैर

कोशीष...  हूयि हि नहीं ......


हर कोई आके ....

आपण हिसाब रख गया....

मेरे हिसाब का तो

जिक्र तक न हुवा कहीं....!!!

 जब बच्चे थे ,तब अच्छे थे

माना के थोडेसे ,कच्चे थे

पर दिल के ,बडे ही सच्चे थे


अबतो सारा तोल है

हर बातका मोल है

गिन गिन कर आते

हर तरफ से बोल है


Sunday, September 5, 2021

 मैं लिख पता ....

अपणी बात ....

तब तक खत्म हुई 

कलम की स्याही.....


पर सबने तो 

मेरे हुनर पे ही

उंगली उठाई


मेरी सच्चई 

जो शायद ही सच थी

उसपर ना दि 

किसिने कोई गवाही


मैं खुद भी अब उसे 

झूट मान राहां हूँ

अब तो मैं बस 

जीए जा राहा हूँ

मैं अकेला

मेरे कल वाले मुझसे  कल मेरी मुलाकात हुई तो मैंने उससे उसकी  "खुशहाली" ...... पूछ ही ली... क्यों की मैं जानता था के वो चाहता था  के...