Saturday, August 28, 2021

 ना जाणे कैसे

गैरों को भी

जीत लेतें लोग

हमें तो ता-उम्र

अँपनोंको मनांना

भी ना आया🤗🤗


कलम ने कागज से 
कह दिये है...
तब जाके काहाँ......
अल्फाज "आशियानें" बने हैं।
ऐसे तो .....
खंडहर बने पडे थे 
दिल के किसीं कोणे में,
अरमान कई सारे।

Thursday, August 5, 2021

तू बोलत राहा कविते सारखं......

मी ऐकत राहीन गाण्या सारखं.....

कुठे थोडं उथळ........ ....

कुठे जरा खोल..............

वाहत राहू आपण "पाण्यासारखं"!!

 धुवां उठा ,आग लागी

आसमांतक लपट गाई

और फ़िरसे खांक हुई

एक चिंगरी पडी  वहीं

रात भर वो जगती राही

अंखोपेसे धुल हटाकर

असमान को तख्ती राही

जां नाहीं थी उसमें कुछभी

हलकी हवापे भी गुरांती

जरा चमकती ,फिर बुझ जाती

अपने मन को खुद बहलाती

फिर अंधेरा जायेगा

नई रोशनी लायेगा

मैं फिर ज्योत बन जाऊंगी

इसी हवापे लहराउंगी

खुद ही पे इतराउंगी

बस कुछ देर की बात हैं

कुछ पल ही की तो रात हैं


मैं अकेला

मेरे कल वाले मुझसे  कल मेरी मुलाकात हुई तो मैंने उससे उसकी  "खुशहाली" ...... पूछ ही ली... क्यों की मैं जानता था के वो चाहता था  के...