Friday, March 10, 2023

गुनाहगार

    हजारों बार निकाला गया ....

रुह को दफनाकर मेरे,

गुनाह तो कुछ भी न था 

पर,इल्ज़ाम ही इतने संगीन थे...


 हम तो नशे में चूर 

गम के अंधेरों में कहीं दूर थे

कहते हैं.....

जोगीपन का तो बस चोला है पहना 

उस रात तो हम बड़े ही रंगीन थे.....?

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